एक ही ग़ज़ल

नमस्कार दोस्तों,

 इस  पेज पर जो ग़ज़ल लिख रहा हूँ वो एक ही ग़ज़ल है जिसे लगातार एक-एक शेर जोड़कर बढ़ाते जाऊंगा अब देखते है इस ग़ज़ल में कब तक कितने शेर जुड़ते है और ये ग़ज़ल कहाँ तक पंहुचती है